
अमेरिका की राजनीति में इस समय सबसे चर्चित मामला है Donald Trump Tariffs Verdict। 10 महीने चली कानूनी लड़ाई के बाद Supreme Court of the United States ने ट्रंप द्वारा लगाए गए टैरिफ को अवैध घोषित कर दिया।
दुनिया जानती है कि हार किसकी हुई। लेकिन जीत किसकी हुई? कहानी यहां दिलचस्प होती है। इस केस के पीछे हैं Rick Woldenberg, जो शिकागो के पास स्थित अपनी कंपनी Learning Resources के CEO हैं।
उनकी कंपनी बच्चों के लिए educational toys बनाती है। पारिवारिक व्यवसाय। मां ने शुरू किया था, बेटे ने आगे बढ़ाया। जब ट्रंप ने International Emergency Economic Powers Act यानी IEEPA 1977 के तहत टैरिफ लागू किए, तो वोल्डनबर्ग को लगा कि ये सिर्फ trade policy नहीं, बल्कि छोटे कारोबारों की कमर पर करंट है।
“Tariff Shock”: छोटे बिज़नेस पर बड़ा वार
रिक का तर्क साफ था। बड़ी कंपनियां लॉबिंग कर सकती हैं। सप्लाई चेन diversify कर सकती हैं। लेकिन small और mid-size businesses? उनके लिए टैरिफ मतलब सीधा cost explosion। उनकी कंपनी का मशहूर प्रोडक्ट BubblePlush Yoga Ball Buddies टैरिफ की मार से बुरी तरह प्रभावित हुआ। एक shipment पर 50,000 डॉलर अतिरिक्त शुल्क देना पड़ा।
वेयरहाउस प्रोजेक्ट रद्द। नई hiring रोकनी पड़ी। Marketing budget कट। एक thriving company अचानक survival mode में चली गई।
कोर्टरूम में 10 महीने की लड़ाई
रिक वोल्डनबर्ग ने तुरंत वकीलों से संपर्क किया और राष्ट्रपति ट्रंप के खिलाफ मुकदमा दायर कर दिया। उनका दावा था कि IEEPA 1977 राष्ट्रपति को unilateral tariff लगाने की शक्ति नहीं देता। निचली अदालतों ने भी टैरिफ को अवैध माना। और अंततः सुप्रीम कोर्ट ने भी यही फैसला सुनाया।
रिक ने करोड़ों डॉलर फीस में खर्च किए, लेकिन इसे उन्होंने खर्च नहीं, “investment in constitutional clarity” बताया।

बड़े कॉरपोरेट्स चुप, छोटे कारोबारी साथ
रिक के अनुसार, बड़े अमेरिकी कॉरपोरेट्स इस कानूनी लड़ाई में खुलकर साथ नहीं आए। कारण? Backup supply chains, political access और lobbying muscle.
लेकिन छोटे बिजनेसमैन और कुछ NGOs ने उनका समर्थन किया। यह केस अब सिर्फ टैरिफ का नहीं रहा, बल्कि small business vs executive overreach की बहस बन गया।
India पर क्या असर?
फैसले के बाद सवाल उठ रहा है कि क्या भारत को 18% टैरिफ देना पड़ेगा या नहीं। Trade experts मानते हैं कि यह फैसला US trade negotiations को नया मोड़ दे सकता है। खासकर एशिया और भारत के साथ future trade deals में। ट्रंप ने बयान में PM मोदी का नाम लेकर संकेत दिया कि नई trade understanding पर बातचीत जारी है।
यह मामला सिर्फ एक toy company का नहीं है। यह उस बहस का हिस्सा है जिसमें सवाल है क्या राष्ट्रपति emergency powers का उपयोग trade policy के लिए कर सकते हैं? रिक वोल्डनबर्ग ने यह दिखाया कि कभी-कभी Washington की दीवारों में दरार एक खिलौना फैक्ट्री से भी पड़ सकती है।
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